महात्मा भरत ने यंहा मारा था महावीर हनुमान को बाण!

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भाटकोट को पहले भरतकोट के नाम से जाना जाता था। इस स्थान का यह नाम राजा राम के छोटे भाई भरत के नाम पैर पड़ा। कहा जाता है कि श्री राम के वनवाश के समय महात्मा भरत ने इसी स्थान पर तपस्या कि थी। रामायण के युद्ध के समय जब लक्ष्मण मेघनाथ के शक्ति प्रहार से मूर्छित हो गए थे तब वीरवार हनुमान उनके प्राणों कि रक्षा के लिए संजीवनी बुटी लेने हिमालय पर्वत गए। जब वो वापिस रहे थे तो भरत को लगा के कोई राक्षस आक्रमण के लिए आकाश मार्ग से रहा है। उन्होंने ये अनुमान लगा कर हंनुमान पर बाण चला दिया। महावीर हनुमान मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े और मूर्छित अवश्था में भी राम नाम का समरण करने लगे। यह देख कर भरत को बहुत ग्लानि हुयी कि उन्होंने एक राम भक्त पर बाण चला दिया। भरत ने हमुमान जी से क्षमा याचना कि और उनसे पूरा वृतांत सुना। वाल्मीकि ने इस स्थान को कारुपथ का नाम दिया है. यह स्थान अत्रि मुनि, गार्गी ऋषि, सुखदेव मुनि अदि संतो कि तपस्या भूमि भी रहा है।


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