देशांतर रेखाएं

देशांतर रेखाएं

देशांतर रेखाएं:-
देशांतर (अंग्रेज़ी:लॉन्गीट्यूड, Long., λ, या लैम्ब्डा) रेखाएं पृथ्वी के दोनों भूगोलीय ध्रुवों के बीच खींची गई काल्पनिक रेखाओं का समूह है| ये रेखाएं एक दूसरे के लम्बवत होती है | ध्रुवों पर ये रेखाएं आपस मै मिल जाती है, ये रेखाएं अर्ध-वर्ताकार होती है| देशान्तर और अक्षांश रेखाएं मिलकर एक ग्रिड का निर्माण करती है| अक्षांश के समानांतर के विपरीत, देशांतर की शिरोबिन्दुएं लंबाई में एकसमान होती हैं। जब हम विषवत रेखा से ध्रुवों की और जाते है तो इन के मध्य की दुरी काम होती जाती है|
0° देशांतर जो इंग्लैण्ड के ग्रीनविच स्थान से गुजरती है उसे ग्रीनविच रेखा कहते हैं। यह देशांतर को ग्रीनविच मीन टाइम/प्राइम मेरीडियन (जीएमटी) माना जाता है| इस रेखा से पूर्व में स्थित सभी 180° देशांतरों को पूर्वी देशान्तर और पश्चिम में स्थित सभी 180° देशांतरों को पश्चिमी देशान्तर कहा जाता है| सामान्यता पूर्वी देशान्तर को E और पश्चिमी देशान्तरों को W द्वारा निर्देशित किया जाता है| दो देशान्तरों के मध्य 4 मिनट का अंतर होता है, अथार्त पृथ्वी 1° देशांतर घूमने मे 4 मिनट का समय लेती है|
15° धूमने पर पृथ्वी १ घंटा समय लेती है|

देशांतर रेखाएंप्रशांत महासागर में उत्तर से दक्षिण तक फैली है, 180° देशांतर को अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा का दर्जा 1884 में वाशिंगटन में हुए एक समझौते में लिया गया। यह रेखा सीधी नहीं है, क्योकि पूर्व और पश्चिमी देशो में एक समान समय बनाए रखने के इस रेखा को कई स्थानों पर पूर्व मै तो कई स्थानों पर पश्चिम की और झुकाया गया है| जैसे- 66½° उत्तर में पूर्व की ओर झुकाव बेरिंग जलसन्धि तथा पूर्वी साइबेरिया में एक समय रखने के लिए।
52½° उत्तर में पश्चिम की ओर झुकाव, एल्युशियन द्वीप एवं अलास्का में एक ही समय दर्शाने के लिए।
52½° दक्षिण में पूर्व की ओर झुकाव, एलिस, वालिस, फिजी, टोंगा, न्यूजीलैंड एवं ऑस्ट्रेलिया में एक ही समय रखने के लिए।
जब कोई भी अंतरराष्ट्रीय रेखा को पर करता है तो तिथि में एक दिन का अंतर हो जाता है| अथार्त जब हम पूर्व से पश्चिम मै जाते समय तिथि रेखा को पर कर ता है तो उसे एक दिन का नुकसान हो जाता है| इसी प्रकार जब हम पश्चिम से पूर्व की यात्रा करता है तो यात्रा करने वाले को एक दिन का फायदा होगा|
ग्रीनविच याम्योत्तर 0°देशांतर पर है यह ग्रीनलैंड व नार्वेजियन सागर, ब्रिटेन, फ़्रांस, स्पेन, अल्जीरिया, माले, बुर्किनाफासो, घाना व दक्षिण अटलांटिक समुद्र से गुजरता है। प्रमाणिक समय- चूँकि विभिन्न देशान्तरों पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय भिन्न-भिन्न होता है। इसके कारण बड़े विशाल देश के एक कोने से दूसरे कोने के स्थानों के बीच समय में बड़ा अंतर पड़ जाता है। फलस्वरूप तृतीयक व्यवसायों के सेवा कार्यों में बड़ी बाधा उत्पन्न हो जाती है। इस बाधा व समय की गड़बड़ी को दूर करने के लिए सभी देशों में एक देशांतर रेखा के स्थानीय समय को सारे देश का प्रमाणिक समय मान लिया जाता है। इस प्रकार में सभी स्थानों पर मने जाने वाले ऐसे समय को प्रमाणिक समय व मानक समय कहते हैं।
भारत में 82°30´ पूर्वी देशांतर रेखा को मानक मध्यान्ह रेखा (मानक समय) माना गया है।यह रेखा इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश) के निकट स्थित नैनी नमक स्थान से गुजरती है। भारत का प्रमाणिक समय ग्रीनविच मध्य समय (GMT- Greenwich Mean Time) से 5 घंटा मिनट आगे है।
भारत का मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम से 5½ घंटा आगे रहता है।
दो देशान्तरों के बीच की दुरी को गोरे कहा जाता है|
दो देशान्तरों के मध्य सर्वाधिक(111.32 किमी.) दुरी भूमध्य रेखा पर होती है|
पृथ्वी पर कुल देशान्तरों की संख्या 360 है|

ताप कटिबंध
कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के क्षेत्र में सबसे अधिक गर्मी होती है क्योकि इन अक्षांशों पर वर्ष में कम से कम एक बार दोपहर को सूर्य की स्थिति सिर के ऊपर होती है। इसलिए इस क्षेत्र को उष्णकटिबंध कहा जाता है। कर्क रेखा और मकर रेखा उष्णकटिबंध की बाहरी सीमा बनाते हैं। उष्णकटिबंध पृथ्वी का सबसे गर्म हिस्सा और विश्व के अधिकतर रेगिस्तान इन्ही अक्षांशो मै स्थित हैं।
23 1/2°(कर्क रेखा) उत्तरी अक्षांश और 23 1/2°(मकर रेखा) दक्षणी अक्षांश के बाहरी अक्षांशो पर सूर्य की किरण सीधी नहीं पड़ती, यही कारण है कि ध्रुवों की तरफ जाने पर हम पाते है की सूर्य की किरणों का लोप हो जाता है| परिणामस्वरूप कर्क रेखा और आर्कटिक वृत्त और मकर रेखा और अंटार्कटिक वृत्त के बीच आने वाले क्षेत्रों का तापमान मध्यम होता है, अथार्त इन इलाकों में न तो बहुत अधिक गर्मी पड़ती है और न ही बहुत अधिक ठंड। इसलिए इन्हे शीतोष्ण कटिबंध हैं।


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